भगवा आंतकवादियों की भी होगी धर-पकड़
- 2006 के बाद हुए धमाकों की नए सिरे से होगी जांच: चिदंबरम
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 18 फरवरी। अगर गृहमंत्री पी. चिदंबरम की इस बात को सही माने कि जब से उन्होंने हिन्दू संगठनों की आंतकवादी गतिविधियों की जांच शुरू कराई है और संघ के अनुषंगी संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कराया है, तभी से भाजपा उनके खिलाफ आक्रामक हुई है। अभी तक तमाम एजेंसियां मुस्लिम आतंकी संगठनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी तो संघ को कोई ऐतराज नहीं था। जब समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट और माले गांव विस्फोट की जांच की गई और उसमें भगवा आतंकवाद का चेहरा नजर आया तो संघ और उससे जुड़े संगठनों के सुर ही बदल गए। हिन्दू संगठनों के आगे के संकेत अच्छे नहीं दिख रहे हैं। गृहमंत्री ने हिन्दू संगठनों के खिलाफ जांच तेज करने का निर्देश दिया है। इंदौर में संघ से जुड़े रहे कमल चौहान को समझौता बत विस्फोट में गिरफ्तारी के बाद नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के जांच की पूरी दिशा ही बदल गई है। गृहमंत्रालय ने एनआईए को पिछले पांच-छह साल में हुई आंतकी घटनाओं की नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अब एनआईए इन घटनाओं की जांच हिन्दू संगठनों को केन्द्र में रखकर करेगी। इससे भाजपा को फिर यह कहने का मौका मिलेगा कि चिदंबरम ने एनआईए का गठन संघ और दूसरे हिन्दू संगठनों को फंसाने के लिए ही किया है। चिदंबरम के नए निर्देशों के बाद एनआई 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट, 2007 के समझौता और मक्का मस्जिद विस्फोट और उसके बाद हुए अजमेर और मोडासा विस्फोट की जांच नए सिरे से करेगी। एनआईए अब तक संघ से जुड़े रहे कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जिनमें असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा, देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा तथा कमल चौहान आदि हैं।
संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार से पूछताछ हुई है। अब सरकार ज्यादा सख्ती के साथ हिन्दू संगठनों की जांच करेगी। नतीजा जो भी निकले चिदंबरम और दिग्विजय सिंह का फोकस यह साबित करने पर रहेगा कि संघ आतंकी घटनाओं में शामिल है। इसमें संघ बेकफुट पर आया है और भाजपा से कहा गया है कि वे सरकार की इस चाल का जोरदार ढंग से जवाब दे। इस जवाबी कार्रवाई में सरकार और विपक्ष का टकराव और बढ़ेगा।