Friday, 2 December 2011

गृह मंत्रालय के दखल के बाद ही स्पेशल सेल ने किया था कथित आंतकियों का खुलासा


गृह मंत्रालय के दखल के बाद ही स्पेशल सेल ने किया था कथित आंतकियों का खुलासा
मो.अनस सिद्दीक़ी
दिल्ली पुलिस में एक जमाने तक ढीला पड़ चुका स्पेशल सेल पिछले कुछ दिनों में ही सक्रिय हुआ। इसका कारण गृह मंत्रालय का हस्तक्षेप बताया जाता है। हांलाकि अभी तक दिल्ली पुलिस में तेज तर्रार अफसरों में पूर्व एसीपी लक्ष्मी नारायण राव, राजबीर सिंह और आईपीएस अधिकारी करनैल सिंह का ही नाम चर्चित था। इनमें से एसीपी राजबीर सिंह की हत्या हो चुकी है। लक्ष्मी नारायण राव की पदोन्नति हो चुकी है तथा करनैल सिंह भी पदोन्नत हो चुके हैं। जिसकी वजह से स्पेशल सेल में तेज तर्रार मुखबिरों के गिरोह ने भी किनारा करना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि इन मुखबिरों को पुलिस के कई अधिकारी काम लेने के बाद भुगतान नहीं कर रहे थे। अर्थात एक तरह से स्पेशल सेल मूर्छित अवस्था में आ गया था।
काबिलेगौर है कि आठ सितम्बर को गृह मंत्रालय के दखल के बाद एसीपी संजीव कुमार यादव को स्पेशल सेल में वापस बुलाया गया था। गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट बम ब्लास्ट करने वाले आतंकवादियों का सुराग नहीं लगने से हाथ पांव फूलने के बाद अब तमाम शिथिल पडी एजेंसियों को सक्रिय करने का निर्णय लिया था। जिसकी मदद से आतंकवादियों की तलाश का काम तेज किया जा सके। हांलाकि गृह मंत्रालय ने आतंकवादियों के सफाये के लिए एनआईए नामक स्वायत्त संस्था का भी गठन किया और उसमें सैकड़ों लोगों की फोज को भर दिया गया। लेकिन एनआईए के अधिकारी स्वयं भी अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस करते हैं तो फिर वह दिल्लीवासियों को कैसे सुरक्षित कर पाऐंगे इसमें संदेह है। अपने गठन के तीन वर्ष के बाद भी एनआईए आज तक किसी भी मामले का खुलासा नहीं कर सका है।
दिल्ली में आंतकवादी ऑपरेशन में माहिर एसीपी संजीव कुमार यादव को राजनीतिक दबाव के तहत स्पेशल सेल को शिथिल करने के क्रम में स्पेशल सेल से हटाकर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात कर दिया गया था। तकरीबन डेढ़ साल के बाद उनको वापस स्पेशल सेल के आंतकवाद निरोधक अभियान में तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल केंद्रीय गृह मंत्रालय और आईबी के परस्पर सहयोग से काम करती है।
संजीव कुमार यादव को लाने के साथ ही स्पेशल सेल के जाबांज अफसर एलएन राव को फिर आतंकवाद निरोधक गतिविधियों में लगाने की सुगबुगाहट है। बदले निजाम में तरक्की देकर एलएन. राव को एडिशनल डीसीपी तो बना दिया गया पर उनकी विशेषज्ञता वाली आतंकवाद निरोधक गतिविधियों से हटाकर स्पेशल सेल के ही प्रशासनिक काम में लगा रखा है।
सूत्रों के अनुसार एलएन. राव के अलावा डीसीपी आलोक कुमार को स्पेशल सेल में दोबारा लाने पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। तीन साल पहले तक स्पेशल सेल को आतंकवादियों के जी का जंजाल बना देने वाले अफसर आलोक कुमार फिलहाल अरूणांचल प्रदेश के एक जिला के एसएसपी के तौर पर काम कर रहे हैं। आलोक कुमार को आतंकवाद निरोधी अभियान में लगी टीम के बीच बेहतर सामन्जस्य के साथ काम करने के लिए जाना जाता है। आलोक कुमार के साथ 1996-97 से दिल्ली को आतंकवादियों से महफूज रखने में लगे वरिष्ठ अधिकारी करनैल सिंह को दिल्ली लाने की चर्चा है। करनैल सिंह फिलहाल मिजोरम के एडीजी हैं।
दिल्ली पुलिस के हलके में चर्चा है कि बटला हाउस इन्काउटर के साथ घिनौनी राजनीति का सिलसिला तेज हो गया था। पुलिस मुठभेड़ में इंस्पेक्टर मोहन चन्द शर्मा को उनके प्रतिद्वंदी ने निबटा दिया था। जिसको लेकर कई मुसलिम संगठनों ने आवाज उठाई थी कि बटला हाउस में हुई मुठभेड़ में मारे गए किसी भ्ज्ञी आरोपी की गोली से इंस्पेक्टर मोहन चन्द शर्मा की मौत नहीं हुई है बल्कि उनको प्रतिस्पद्र्धा के चलते विरोधी ने निबटाया है। मामले को तूल पकड़ता देख दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर आतंकवाद के सफाए में लगे विशेषज्ञ अफसरों की इस टीम को तितर बितर करने का सिलसिला शुरू दिया गया था। आतंकवादियों के बढ़तेे हौसले को खत्म करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके लिए दिल्ली पुलिस में तैनात आतंकवाद के विशेषज्ञ अफसरों को टटोला जा रहा है। तिहाड जेल के डीजी नीरज कुमार और अशोक चांद जैसे अफसरों पर भी गृह मंत्रालय में चर्चा हो रही है।

जर्मन बेकरी ब्लास्ट मे कितने हैं मास्टर माइंड!


जर्मन बेकरी ब्लास्ट मे कितने हैं मास्टर माइंड!
- गत वर्ष अक्टूबर में महाराष्टï्र एटीएस ने किया था खुलासा
- एक वर्ष के बाद दिल्ली ने भी किया पुन: खुलासा, घटना एक मास्टर मांइड अनेक
मो.अनस सिद्दीक़ी
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के तीन दर्जन से अधिक जांबाज बहादुरों ने दो दिन पूर्व जिस नाटकीय अंदाज में एक नहीं बल्कि तीन-तीन आंतकी हमलों का खुलासा किया है। उसे देखकर तो कोई भी सकते में आ सकता है। पकड़े गए कथित छह आंतकियों के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ और दो एके47 रायफल मय जिंदा कारतूसों के जो पकड़ा था। यदि वास्तव में बरामद चीजों का खुदा न ख्वास्ता इस्तेमाल हो गया होता तो न जाने कितना जानमाल का नुकसान हो गया होता। लेकिन सच्चाई कोसों दूर है दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों के अधिकारिक बयानों और कथित इस खुलासे से। यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि बिहार पुलिस और महाराष्टï्र सरकार के एटीएस के आला अधिकारी कह रहे हैं।
गृहमंत्रालय ने दिल्ली पुलिस के जिन अफसरों की फौज को आंतक के सफाये के लिए एकत्रित किया, उनमें से कई पुलिस अधिकारियों को राष्टï्रपति पुलिस मेडल तक से नवाजा जा चुके हैं। अब वह पुलिस अधिकारी वाह-वाही पाने के लिए किसी बेकसूर को बलि का बकरा बनाए और उसमें एक जिम्मेदार केन्द्रीय गृहमंत्री हां में हां मिलाए तो उस मामले का ऊपर वाला ही मालिक है।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के जांबाज और राष्टï्रपति पुलिस मेडल से नवाजे जा चुके एसीपी संजीव कुमार यादव और उनकी टीम ने जिन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों को गिरफ्तार करने का दावा किया है उनमें मो. अली उर्फ अजमल उर्फ शोएब निवासी करांची पाकिस्तान, मो कतील सिद्दीकी उर्फ साजन, उर्फ सज्जन, उर्फ जावेद, उर्फ शहजादा सलीम निवासी दरभंगा, बिहार, हाल निवासी दिल्ली, मो. इरशाद खान, निवासी समस्तीपुर, बिहार हाल निवासी दिल्ली, गौहर अजीज खुमानी निवासी दरभंगा, बिहार, हाल निवासी दिल्ली, गयूर अहमद जमाली निवासी मधुबनी, बिहार, तथा अब्दुर रहमान निवासी दरभंगा, बिहार हाल निवासी चैन्नई है।
दरभंगा, बिहार जोन के आईजी आरके मिश्रा और दरभंगा जोन के डीआईजी सुधांशु कुमार गयूर जमाली निवासी दरबार मोहल्ला थाना सकरी, मधुबनी, बिहार तथा मो. अजमल निवासी मधुबनी, बिहार के बारे में पहले ही सफाई दे चुके हैं। बिहार के इन दोनों अधिकारियों के मुताबिक फर्र्जी पासपोर्ट के मामले में पूछताछ के लिए कहकर दिल्ली पुलिस ने मदद मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इनको आंतकी बताकर बुक कर दिया। जबकि गयूर दरभंगा के एक मदरसे में पढ़ता है और उसके पिता होम्योपैथी के डॉक्टर है। लेकिन दिल्ली पुलिस इन दोनों युवकों को इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य बताकर साबित करने की कोशिश की है कि बिहार में भी आंतकवादियों का गढ़ है। जबकि बिहार पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद की थी। वहीं बिहार के गृह सचिव आमिर सुभानी का कहना है कि दोनों युवकों के विरुद्ध मधुबनी जिले में एक भी मामला पंजीकृत नहीं है। उन्हें हैरानी है कि दिल्ली पुलिस ने किस तरह अपने स्वार्थ की खातिर उन्हें फंसा दिया।
जर्मन बेकरी धमाके के बारे में महाराष्टï्र एटीएस ने 2 अक्टूबर 2010 को एक संवाददाता सम्मेलन में खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर चुकी है। महाराष्टï्र एटीस के मुखिया राकेश मारिया ने दावा किया था कि उनकी टीम ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से दो किलो आरडीएक्स(विस्फोटक पदार्थ), पेन ड्राइव, यूएस एवं भारतीय मुद्रा आदि बरामद करने का दावा किया गया था। पकड़े गए आरोपियों को पाक प्रायोजित आंतकी संगठन लश्कर ए तौयबा का सक्रिय सदस्य और जर्मन बकरी बम धमाके का मास्टर मांइड हिमायत बैग को बताया गया था। हिमायत बैग को ओरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया था और   उसके दूसरे साथी बिलाल को नासिक से गिरफ्तार करने का दावा किया गयाा था। बताया गया था कि जर्मन बेकरी धमाके की योजना लातूर जिले के उदगीर के एक साइबर कैफे में बनाई गई थी। जिसमें हिमायत बैग की मोहम्मद अहमद जरार सिद्दी बापा और यासीन के साथ तीन फरवरी 2010 को एक मीटिंग उदगीर के ग्लोबल इंटरनेशनल कैफे में हुई थी। महाराष्टï्र एटीएस के मुखिया के अनुसार 7 फरवरी 2010 को हिमायत बैग और यासीन ने उदगीर स्थित साइबर कैफे में विस्फोटक पदार्थ दिया था। जिसका 13 फरवरी 2010 को जर्मन बेकरी धमाके में इस्तेमाल किया गया था। बताया गया था कि इन लोगों की कई अन्य स्थानों पर भी धमाके करने की योजना थी। महाराष्टï्र सरकार ने जर्मन बेकरी धमाके का मास्टर मांइड हिमायत बैग को बताया था और उसके अन्य दो साथी यासीन और मोहसिन को फरार बताया था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि एक घटना में कितने मास्टर मांइड है। एक ही घटना का कितने बार खुलासा होगा। वहीं हास्यापद स्थित यह है कि केन्द्रीय गृहमंत्री तथ्यों को नजरअंदाज कर दिल्ली पुलिस के इस फर्जी खुलासे की खुले दिल से हिमायत करते हुए बयान देते हैं। वह भूल जाते है कि इसी देश की अन्य एजेंसी पहले ही खुलासा कर चुकी है।
अवाम ए  हिंद पहले ही लिख चुका है कि दिल्ली पुलिस बुनियादी तौर पर जामा मस्जिद फायरिंग केस में घोषित तीस लाख रूपये के इनाम के फेर और पुन: राष्टï्रपति एवार्ड का खेल है। यही वजह है कि दिल्ली पुलिस ने आनन-फानन में कथित इंडियन मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य यासीन भटकल उर्फ इमरान के बारे में सुराग देने वाले को 15 लाख रूपये बतौर इनाम देने की घोषणा दिल्ली पुलिस मुखिया ने कर डाली। यानी कि दिल्ली पुलिस का मकसद किसी ब धमाके का खुलासा करना नहीं था कि बल्कि उन नामचीन हादसों की आड़ में जामा मस्जिद फायरिंग मामले में घोषित इनाम को हथियाना है!