गृह मंत्रालय के दखल के बाद ही स्पेशल सेल ने किया था कथित आंतकियों का खुलासा
मो.अनस सिद्दीक़ी
दिल्ली पुलिस में एक जमाने तक ढीला पड़ चुका स्पेशल सेल पिछले कुछ दिनों में ही सक्रिय हुआ। इसका कारण गृह मंत्रालय का हस्तक्षेप बताया जाता है। हांलाकि अभी तक दिल्ली पुलिस में तेज तर्रार अफसरों में पूर्व एसीपी लक्ष्मी नारायण राव, राजबीर सिंह और आईपीएस अधिकारी करनैल सिंह का ही नाम चर्चित था। इनमें से एसीपी राजबीर सिंह की हत्या हो चुकी है। लक्ष्मी नारायण राव की पदोन्नति हो चुकी है तथा करनैल सिंह भी पदोन्नत हो चुके हैं। जिसकी वजह से स्पेशल सेल में तेज तर्रार मुखबिरों के गिरोह ने भी किनारा करना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि इन मुखबिरों को पुलिस के कई अधिकारी काम लेने के बाद भुगतान नहीं कर रहे थे। अर्थात एक तरह से स्पेशल सेल मूर्छित अवस्था में आ गया था।
काबिलेगौर है कि आठ सितम्बर को गृह मंत्रालय के दखल के बाद एसीपी संजीव कुमार यादव को स्पेशल सेल में वापस बुलाया गया था। गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट बम ब्लास्ट करने वाले आतंकवादियों का सुराग नहीं लगने से हाथ पांव फूलने के बाद अब तमाम शिथिल पडी एजेंसियों को सक्रिय करने का निर्णय लिया था। जिसकी मदद से आतंकवादियों की तलाश का काम तेज किया जा सके। हांलाकि गृह मंत्रालय ने आतंकवादियों के सफाये के लिए एनआईए नामक स्वायत्त संस्था का भी गठन किया और उसमें सैकड़ों लोगों की फोज को भर दिया गया। लेकिन एनआईए के अधिकारी स्वयं भी अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस करते हैं तो फिर वह दिल्लीवासियों को कैसे सुरक्षित कर पाऐंगे इसमें संदेह है। अपने गठन के तीन वर्ष के बाद भी एनआईए आज तक किसी भी मामले का खुलासा नहीं कर सका है।
दिल्ली में आंतकवादी ऑपरेशन में माहिर एसीपी संजीव कुमार यादव को राजनीतिक दबाव के तहत स्पेशल सेल को शिथिल करने के क्रम में स्पेशल सेल से हटाकर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात कर दिया गया था। तकरीबन डेढ़ साल के बाद उनको वापस स्पेशल सेल के आंतकवाद निरोधक अभियान में तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल केंद्रीय गृह मंत्रालय और आईबी के परस्पर सहयोग से काम करती है।
संजीव कुमार यादव को लाने के साथ ही स्पेशल सेल के जाबांज अफसर एलएन राव को फिर आतंकवाद निरोधक गतिविधियों में लगाने की सुगबुगाहट है। बदले निजाम में तरक्की देकर एलएन. राव को एडिशनल डीसीपी तो बना दिया गया पर उनकी विशेषज्ञता वाली आतंकवाद निरोधक गतिविधियों से हटाकर स्पेशल सेल के ही प्रशासनिक काम में लगा रखा है।
सूत्रों के अनुसार एलएन. राव के अलावा डीसीपी आलोक कुमार को स्पेशल सेल में दोबारा लाने पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। तीन साल पहले तक स्पेशल सेल को आतंकवादियों के जी का जंजाल बना देने वाले अफसर आलोक कुमार फिलहाल अरूणांचल प्रदेश के एक जिला के एसएसपी के तौर पर काम कर रहे हैं। आलोक कुमार को आतंकवाद निरोधी अभियान में लगी टीम के बीच बेहतर सामन्जस्य के साथ काम करने के लिए जाना जाता है। आलोक कुमार के साथ 1996-97 से दिल्ली को आतंकवादियों से महफूज रखने में लगे वरिष्ठ अधिकारी करनैल सिंह को दिल्ली लाने की चर्चा है। करनैल सिंह फिलहाल मिजोरम के एडीजी हैं।
दिल्ली पुलिस के हलके में चर्चा है कि बटला हाउस इन्काउटर के साथ घिनौनी राजनीति का सिलसिला तेज हो गया था। पुलिस मुठभेड़ में इंस्पेक्टर मोहन चन्द शर्मा को उनके प्रतिद्वंदी ने निबटा दिया था। जिसको लेकर कई मुसलिम संगठनों ने आवाज उठाई थी कि बटला हाउस में हुई मुठभेड़ में मारे गए किसी भ्ज्ञी आरोपी की गोली से इंस्पेक्टर मोहन चन्द शर्मा की मौत नहीं हुई है बल्कि उनको प्रतिस्पद्र्धा के चलते विरोधी ने निबटाया है। मामले को तूल पकड़ता देख दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर आतंकवाद के सफाए में लगे विशेषज्ञ अफसरों की इस टीम को तितर बितर करने का सिलसिला शुरू दिया गया था। आतंकवादियों के बढ़तेे हौसले को खत्म करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके लिए दिल्ली पुलिस में तैनात आतंकवाद के विशेषज्ञ अफसरों को टटोला जा रहा है। तिहाड जेल के डीजी नीरज कुमार और अशोक चांद जैसे अफसरों पर भी गृह मंत्रालय में चर्चा हो रही है।