Friday, 2 December 2011

जर्मन बेकरी ब्लास्ट मे कितने हैं मास्टर माइंड!


जर्मन बेकरी ब्लास्ट मे कितने हैं मास्टर माइंड!
- गत वर्ष अक्टूबर में महाराष्टï्र एटीएस ने किया था खुलासा
- एक वर्ष के बाद दिल्ली ने भी किया पुन: खुलासा, घटना एक मास्टर मांइड अनेक
मो.अनस सिद्दीक़ी
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के तीन दर्जन से अधिक जांबाज बहादुरों ने दो दिन पूर्व जिस नाटकीय अंदाज में एक नहीं बल्कि तीन-तीन आंतकी हमलों का खुलासा किया है। उसे देखकर तो कोई भी सकते में आ सकता है। पकड़े गए कथित छह आंतकियों के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ और दो एके47 रायफल मय जिंदा कारतूसों के जो पकड़ा था। यदि वास्तव में बरामद चीजों का खुदा न ख्वास्ता इस्तेमाल हो गया होता तो न जाने कितना जानमाल का नुकसान हो गया होता। लेकिन सच्चाई कोसों दूर है दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों के अधिकारिक बयानों और कथित इस खुलासे से। यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि बिहार पुलिस और महाराष्टï्र सरकार के एटीएस के आला अधिकारी कह रहे हैं।
गृहमंत्रालय ने दिल्ली पुलिस के जिन अफसरों की फौज को आंतक के सफाये के लिए एकत्रित किया, उनमें से कई पुलिस अधिकारियों को राष्टï्रपति पुलिस मेडल तक से नवाजा जा चुके हैं। अब वह पुलिस अधिकारी वाह-वाही पाने के लिए किसी बेकसूर को बलि का बकरा बनाए और उसमें एक जिम्मेदार केन्द्रीय गृहमंत्री हां में हां मिलाए तो उस मामले का ऊपर वाला ही मालिक है।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के जांबाज और राष्टï्रपति पुलिस मेडल से नवाजे जा चुके एसीपी संजीव कुमार यादव और उनकी टीम ने जिन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों को गिरफ्तार करने का दावा किया है उनमें मो. अली उर्फ अजमल उर्फ शोएब निवासी करांची पाकिस्तान, मो कतील सिद्दीकी उर्फ साजन, उर्फ सज्जन, उर्फ जावेद, उर्फ शहजादा सलीम निवासी दरभंगा, बिहार, हाल निवासी दिल्ली, मो. इरशाद खान, निवासी समस्तीपुर, बिहार हाल निवासी दिल्ली, गौहर अजीज खुमानी निवासी दरभंगा, बिहार, हाल निवासी दिल्ली, गयूर अहमद जमाली निवासी मधुबनी, बिहार, तथा अब्दुर रहमान निवासी दरभंगा, बिहार हाल निवासी चैन्नई है।
दरभंगा, बिहार जोन के आईजी आरके मिश्रा और दरभंगा जोन के डीआईजी सुधांशु कुमार गयूर जमाली निवासी दरबार मोहल्ला थाना सकरी, मधुबनी, बिहार तथा मो. अजमल निवासी मधुबनी, बिहार के बारे में पहले ही सफाई दे चुके हैं। बिहार के इन दोनों अधिकारियों के मुताबिक फर्र्जी पासपोर्ट के मामले में पूछताछ के लिए कहकर दिल्ली पुलिस ने मदद मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इनको आंतकी बताकर बुक कर दिया। जबकि गयूर दरभंगा के एक मदरसे में पढ़ता है और उसके पिता होम्योपैथी के डॉक्टर है। लेकिन दिल्ली पुलिस इन दोनों युवकों को इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य बताकर साबित करने की कोशिश की है कि बिहार में भी आंतकवादियों का गढ़ है। जबकि बिहार पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद की थी। वहीं बिहार के गृह सचिव आमिर सुभानी का कहना है कि दोनों युवकों के विरुद्ध मधुबनी जिले में एक भी मामला पंजीकृत नहीं है। उन्हें हैरानी है कि दिल्ली पुलिस ने किस तरह अपने स्वार्थ की खातिर उन्हें फंसा दिया।
जर्मन बेकरी धमाके के बारे में महाराष्टï्र एटीएस ने 2 अक्टूबर 2010 को एक संवाददाता सम्मेलन में खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर चुकी है। महाराष्टï्र एटीस के मुखिया राकेश मारिया ने दावा किया था कि उनकी टीम ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से दो किलो आरडीएक्स(विस्फोटक पदार्थ), पेन ड्राइव, यूएस एवं भारतीय मुद्रा आदि बरामद करने का दावा किया गया था। पकड़े गए आरोपियों को पाक प्रायोजित आंतकी संगठन लश्कर ए तौयबा का सक्रिय सदस्य और जर्मन बकरी बम धमाके का मास्टर मांइड हिमायत बैग को बताया गया था। हिमायत बैग को ओरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया था और   उसके दूसरे साथी बिलाल को नासिक से गिरफ्तार करने का दावा किया गयाा था। बताया गया था कि जर्मन बेकरी धमाके की योजना लातूर जिले के उदगीर के एक साइबर कैफे में बनाई गई थी। जिसमें हिमायत बैग की मोहम्मद अहमद जरार सिद्दी बापा और यासीन के साथ तीन फरवरी 2010 को एक मीटिंग उदगीर के ग्लोबल इंटरनेशनल कैफे में हुई थी। महाराष्टï्र एटीएस के मुखिया के अनुसार 7 फरवरी 2010 को हिमायत बैग और यासीन ने उदगीर स्थित साइबर कैफे में विस्फोटक पदार्थ दिया था। जिसका 13 फरवरी 2010 को जर्मन बेकरी धमाके में इस्तेमाल किया गया था। बताया गया था कि इन लोगों की कई अन्य स्थानों पर भी धमाके करने की योजना थी। महाराष्टï्र सरकार ने जर्मन बेकरी धमाके का मास्टर मांइड हिमायत बैग को बताया था और उसके अन्य दो साथी यासीन और मोहसिन को फरार बताया था। अब ऐसे में सवाल उठता है कि एक घटना में कितने मास्टर मांइड है। एक ही घटना का कितने बार खुलासा होगा। वहीं हास्यापद स्थित यह है कि केन्द्रीय गृहमंत्री तथ्यों को नजरअंदाज कर दिल्ली पुलिस के इस फर्जी खुलासे की खुले दिल से हिमायत करते हुए बयान देते हैं। वह भूल जाते है कि इसी देश की अन्य एजेंसी पहले ही खुलासा कर चुकी है।
अवाम ए  हिंद पहले ही लिख चुका है कि दिल्ली पुलिस बुनियादी तौर पर जामा मस्जिद फायरिंग केस में घोषित तीस लाख रूपये के इनाम के फेर और पुन: राष्टï्रपति एवार्ड का खेल है। यही वजह है कि दिल्ली पुलिस ने आनन-फानन में कथित इंडियन मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य यासीन भटकल उर्फ इमरान के बारे में सुराग देने वाले को 15 लाख रूपये बतौर इनाम देने की घोषणा दिल्ली पुलिस मुखिया ने कर डाली। यानी कि दिल्ली पुलिस का मकसद किसी ब धमाके का खुलासा करना नहीं था कि बल्कि उन नामचीन हादसों की आड़ में जामा मस्जिद फायरिंग मामले में घोषित इनाम को हथियाना है!

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