Friday, 1 June 2012

फसीह को 6 जून तक ढूंढे सरकार :सुप्रीम कोर्ट


फसीह को 6 जून तक ढूंढे सरकार :सुप्रीम कोर्ट
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 01 जून। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को सऊदी अरब के जुबेल से 13 मई 2012 को गिरफ्तार किए गए बिहार के इंजीनियर को ढूंढने और उसकी खैर खबर की रिपोर्ट 6जून 2012 तक देने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश इंजीनियर फसीह मोहम्मद की पत्नी निकहत परवीन की याचिका पर दिया गया।
निकहत परवीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकत्र्ता दायर की थी कि उसके पति फसीह महूमद जो कि सऊदी अरब के जुबैल इलाके में रहते हैं। निकहत ने याचिका में कहा कि वहां पर 13 मई 2012 को सऊदी पुलिस के साथ भारतीय एजेंसी के लोग थे। उन्होंने कहा कि उसके पति की आंतकी कार्रवाई की संलिप्तता के चलते तलाश है। उसे पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। इसके बाद से निकहत परवीन अपने पति फसीह महमूद को ढूंढ रही है। जस्टिस के.एस. राधाकृष्णन और जस्टिस जे.एस. खेहर की खडंपीठ ने सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार और विदेश मंत्रालय को नोटिस दिया था 48 घंटे के भीतर फसीह महमूद के बारेे में रिपोर्ट दाखिल की जाए। इस पर शुक्रवार को केन्द्र सरकार की ओर से काउंसिल आर.पी. भट्ट पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को निकहत परवीन की याचिका पर जवाब देने के लिए दो दिन का समय दिया गया था जो कि अपर्याप्त था। भट्ट गृहमंत्रालय की ओर से पेश हुए थे। अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि याचिकाकत्र्ता निकहत परवीन के पति का मामला बेहद संगीन है। सरकारी वकील ने कहा कि गृहमंत्री को समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि फसीह महमूद के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने कांउसिल के उस बयान पर फटकार लगाते हुए कहा कि फसीह महमूद के बारे में कोई जानकारी सरकार के पास अभी तक क्यों नहीं है। समाचार पत्रों की बात छोड़कर यह बताएं कि सरकार की ओर से क्या जानकारी के उनके पास है।
गौरतलब है कि फसीह महमूद सऊदी अरब में बतौर इंजीनियर कार्यरत है। उसको वहां से भारतीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गृहमंत्रालय की ओर से पेश हुए वकील आर.पी. भट्ट के माध्यम से सरकार को 6 जून तक का समय दिया है कि फसीह महमूद को ढूंढकर अथवा उसके बारे में पुख्ता जानकारी अदालत के समक्ष दी जाए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूछा कश्मीरी छात्र किसके कब्जे में थे
- केन्द्र सरकार और यूपी एटीएस को नोटिस जारी
कार्यालय संवाददाता
नई दिल्ली, 01 जून। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मदरसा जमीयतुल फलाह के दो छात्रों को उत्तर प्रदेश के आंतकविरोधी दस्ता(यूपी एटीएस) के अधिकारियों के द्वारा अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर कैफियत एक्सप्रेस से जबरन गैर कानूनी ढंग से हिरासत में लिया था। इस मामले पर मदरसे के निदेशक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को केन्द्र सरकार और यूपी एटीएस को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में अदालत ने कहा है कि कैसे और क्यों अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से कैफियत एक्सप्रेस से छात्रों को हिरासत में लिया और मौजूदा समय में उनकी क्या स्थिति है।
मदरसा जमीयतुल फलाह के निदेशक मौलाना महमूद ताहिर मदनी ने अदालत में याचिका दायर की थी। मदनी ने पुलिस और यूपी एटीएस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया। अदालत ने एजेंसियों से पूछा कि अगर वो समाज के लिए खतरा बन रहे थे या उनकी वजह से बदअमनी पैदा हो सकती है तो उसके लिए कानून संबंधी धाराओं के तहत गिरफ्तारी की जानी चाहिए। एक समुदाय के लोग ही क्यों बदअमनी फैला रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार, यूपी एटीएस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलीगढ़, पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी आजमगढ़ को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
जमीयतुल फलाह के वकील सैयद फरमान अहमद नकवी ने बताया कि अदालत अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किए गए कश्मीरी छात्रों को लेकर सरकार और यूपी एटीएस के अधिकारियों और उनकी कार्यप्रणाली से सख्त नाराज थी। आंतक के मामले में गिरफ्तारी क्यों और कैसे की गई इस पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के वकील नकवी के अनुसार सीआरपीसी की धारा 57 के अनुसार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी सूचना 24 घंटे के भीतर उसके परिजनों को अदालत में पेश करने से पहले सूचित किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में यूपी एटीएस ने गैरकानूनी ढंग से काम किया है।

Tuesday, 20 March 2012

टीएमसी सांसद के गनर का आंतक, यात्रियों पर किया पेशाब


टीएमसी सांसद के गनर का आंतक, यात्रियों पर किया पेशाब
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली। पॉवर का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है तो उसे कोई कुछ नजर नहीं आता है। ऊपर से शराब का नशा तो बस कहने ही क्या... ऐसा ही एक मामला तृणमूल कांग्रेस की एक सांसद के गनर का प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस की एक सांसद के गनर ने कथित तौर पर राजधानी एक्सप्रेस के दो यात्रियों के ऊपर पेशाब कर दिया। इसके बाद उस गनर ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाली और यात्रियों को मुंह बंद रखने की धमकी भी दे डाली।
चूंकि अभी तक रेल मंत्रालय का ठेका तृणमूल कांग्रेस के पास है। भले ही रेलमंत्री के नाम पर परिवर्तन हो गया हो लेकिन मंत्रालय तो तृणमूल कांग्रेस के पास ही है। शायद इसी नशे से चूर होकर राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के शयनयान(कोच) में सफर कर रहे कोलकाता हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं उनके एक साथी के ऊपर सांसद के गनर ने न केवल पेशाब किया बल्कि अपनी सर्विस रिवाल्वर को लहराते हुए मुंह बदं करने की धमकी भी दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्यक दत्ता नाम के इस यात्री ने इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है। दत्ता ने अपनी शिकायत में कहा है वे अपने एक साथी के साथ इलाहाबाद जा रहे थे। तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष प्रथम श्रेणी के शयनयान में सफर कर रही थी, जबकि आरोपी गनर दत्ता के शयनयान (कोच) में सफर कर रहा था। रात के दो बजे आरोपी गनर ने दत्ता के साथी के ऊपर पेशाब कर दिया। दत्ता के मुताबिक गनर शराब के नशे में था।
दत्ता ने जब यह देखा तो उन्होंने गनर को धक्का देकर पीछे हटाया, लेकिन उसने फिर से खड़ा होकर उनके सूटकेस और साथी पर पेशाब किया। इसके बाद गनर ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और उन्हें चुप रहने की धमकी दी। दत्ता ने इस घटना की शिकायत टीटी से की और बाद में इलाहाबाद स्टेशन पर एफआईआर दर्ज कराई।
हालांकि, रेलवे के अधिकारियों ने शिकायत पुस्तिका में किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज होने से इंकार किया है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे स्टाफ ने इस बात की पुष्टि की है कि शिकायत पुस्तिका में सांसद के अटेंडेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज है कि उसने अन्य यात्रियों के साथ बदतमीजी की। इस बारे में तभी कुछ किया जाएगा, जब ट्रेन दिल्ली से लौट आएगी। तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के शयनयान(कोच) में अपने कुत्ते के साथ सफर कर रही थी।

Monday, 12 March 2012

राज्यसभा के लिए घमासान शुरू, सपा और कांग्रेस में सांसत


- सपा की ओर से मुसलमानों में कमाल फारुकी या शाहिद सिद्दीक़ी
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव को भारी बहुमत मिला है, लेकिन इसके साथ ही उनका सिदर्द भी बढऩे वाला है। 30 मार्च को उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर राज्यसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसमें से मुलायम के हिस्से में छह सीटें जाएंगी। बसपा को सिर्फ दो सीटों से संतोष करना होगा तो भाजपा और कांग्रेस गठबंधन एक-एक सीट जीत पाएंगे। मुलायम सिंह की मुश्किल यह है कि वे किसको राज्यसभा भेजेंगे। चुनाव से ऐन पहले करीब आधा दर्जन नेता दूसरी पार्टियों से टूटकर सिर्फ राज्यसभा सीट की जुगाड़ में मुलायम की पार्टी में शामिल हुए। अगर मुलायम उन सबको उपकृत करते हैं तो उनकी अपनी पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का क्या होगा?
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और सपा के रास्ता बसपा में गए नरेश अग्रवाल अपने पूरे कुनबे के साथ सपा में शामिल हो गए थे। वे बसपा से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन बहनजी ने उन्हें फिर से राज्यसभा नहीं भेजने के संकेत दे दिए थे। इसलिए उन्होंने बिलकुल सही समय पर सपा में एंट्री की। उनका बेटा हरदोई से फिर विधायक हो गया और वे राज्यसभा की जुगाड़ में है। इसी तरह राष्ट्रीय लोकदल के शाहिद सिद्दीकी ने ऐन चुनावों से पहले सपा में एंट्री मारी थी। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नेताजी उनको इस बार राज्यसभा भेजेंगे, आखिर पूरे प्रदेश के मुसलमानों ने अपना मुलायम कहकर उनको वोट दिया है, लेकिन ऐसी ही उम्मीद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े रहे कमाल फारुकी को भी है। उन्होंने भी पूरे चुनाव के दौरान टेलीविजन चैनलों पर सपा की तरफदारी की, जैसे पहले कांग्रेस की किया करते थे। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। इन दो मुस्लिम चेहरों में से मुलायम सिंह किसे चुनेंगे, यह देखने वाली बात होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-रालोद गठबंधन को झटका देने के लिए मुलायम सिंह ने अजित सिंह की सबसे करीबी सहयोगी रही अनुराधा चौधरी को अपनी पार्टी में शामिल कराया था। वे भी राज्यसभा की सीट चाहती है। अगर मुलायम पश्चिम में अपना आधार बढ़ाना चाहेंगे तो वे अनुराधा चौधरी को भी राज्यसभा भेज सकते हैं। सपा के सूत्रों का कहना है कि आयात किए गए कुछ नेताओं को इस बार राज्यसभा मिलेगी और कुछ नेताओं को 2014 में। अगर वे धीरज के साथ सपा में रहते हैं तो दो साल बाद उनकी लॉटरी निकलेगी।
भारतीय जनता पार्टी इस बार राज्यसभा में कुछ नए चेहरों को भेज सकती है। वैसे पार्टी ने अभी राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम पर औपचारिक रूप से विचार नहीं किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक पिछली बार अभिनेत्री स्मृति ईरानी से मात खा जाने वाली पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन इस बार राज्यसभा में जा सकती है। हालांकि यह तय नहीं है कि वे कहां से जाएंगी, लेकिन उनके नाम पर पार्टी आलाकमान में एक राय है। इसी तरह पार्टी ऑफिस का काम संभालने वाले कई मामलों में विवादित सचिव श्याम जाजू की लॉटरी भी खुल सकती है। बताया जा रहा है कि नितिन गडकरी उन्हें राज्यसभा भेजने के पक्ष में है। नए चेहरों में धर्मेंद्र प्रधानऔर अशोक प्रधान के नाम की भी चर्चा है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का नाम छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए चर्चा में है, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की रिश्तेदार करुणा शुक्ला की टिकट कटेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा के पांच सांसद रिटायर हो रहे हैं, लेकिन इस बार चार ही सांसद जीत पाएंगे। तभी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा लॉबिंग हो रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा और कप्तान सिंह सोलंकी का फिर से चुना जाना तय है। इनके अलावा नारायण सिंह केसरी, अनुसूया उइके और मेघराज जैन रिटायर हो रहे हैं।
गुजरात से विजय कुमार रूपानी का फिर से राज्यसभा सदस्य बनना तय माना जा रहा है। गुजरात से भी अरुण जेटली फिर से चुने जाएंगे। इनके अलावा बिहार के रविशंकर प्रसाद और कर्नाटक से हेमा मालिनी का चुना जाना भी तय बताया जा रहा है। महाराष्ट्र से पार्टी के वरिष्ठ नेता बाल आप्टे रिटायर हो रहे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें फिर से टिकट देगी। इसी तरह हिमाचल से रिटायर हो रहे विप्लव ठाकुर के फिर से चुने जाने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में कलराज मिश्र और विनय कटियार  दोनों रिटायर हो रहे हैं। कलराज मिश्र विधानसभा का चुनाव जीत गए हैं। इसलिए विनय कटियार फिर से राज्यसभा में जा सकते हैं।
राज्यसभा में 31 मार्च को रिटायर हो रहे शादीलाल बत्तरा के बाद अब हरियाणा की इस एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए खेमेबंदी शुरू हो चुकी है। पंजाबी समुदाय के बत्तरा को एचआर भारद्वाज को राज्यपाल के तौर पर कर्नाटक भेजे जाने के बाद भारद्वाज के शेष 3 वर्षीय कार्यकाल के लिए राज्यसभा में भेजा गया। मूलत: यह ब्राह्मण सीट है। शादीलाल बत्तरा सांसद के तौर पर कोई असर दिखा पाने में पूरी तरह से असफल रहे और हो सकता है कि पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा का कार्यकाल न दे मगर मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की चली तो यह फूलचंद मुलाना को राज्यसभा भिजवा सकते हैं, लेकिन हरियाणा में उनके विरोधी वीरेंद्र सिंह और शैलजा जाट जगदीश नेहराया रमेश कौशिक की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं। कतार में खड़े अन्य लोगों में रंजीत सिंह भी शामिल है। अगर पार्टी किसी पंजाबी को राज्यसभा भेजती है तो पंजाबी महासभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री एसी चौधरी को राज्यसभा में एंट्री मिल सकती है।

Wednesday, 7 March 2012

इजराइल कार धमाके के आरोप में पत्रकार को किया गिरफ्तार


इजराइल कार धमाके के आरोप में पत्रकार को किया गिरफ्तार
- गिरफ्तार युवक भारत सरकार के पीआईबी से मान्यता प्राप्त पत्रकार रहा है
- पांच वक्त का नमाजी और ईमानदार है आरोपी पत्रकार
- दिल्ली पुलिस के स्पेशल से मुख्य आरोपी को संरक्षण देने और षडयंत्र रचने के आरोप में किया गिरफ्तार, मुख्य आरोपी का कोई अता-पता नहीं
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 07 मार्च। अगर आप मुस्लिम है और निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं तो हो जाइए सावधान। क्योंकि अब चुन-चुनकर मुसलमानों को बताई जाएगी उनकी औकात। कुछ ऐसा ही संदेश दिया है दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने। सेल ने इजराइली दूतावास की कार पर 13 फरवरी को हुए बम हमले के मामले में तीन हफ्ते बाद भारत सरकार के पीआईबी से मान्यता प्राप्त पत्रकार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार मुस्लिम पत्रकार का नाम सैयद मोहम्मद अहमद काजमी है। दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने 20 दिन के पुलिस रिमांड की मांग की थी। जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 20 दिन के लिए पुलिस रिमांड दे दिया है। यह गिरफ्तारी दक्षिणी दिल्ली से की गई है।
गिरफ्तार मुस्लिम पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी को मंगलवार को प्रात: साढ़े ग्यारह बजे इंडिया इस्लामिक सेंटर से पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिया। जबकि दिल्ली पुलिस के स्पेशल ने गिरफ्तारी का समय 2.30 अपराह्नï दिखाया और रात नो बजे उसको उसके घर पर तलाशी के लिए लेकर गए। जहां से पुलिस ने एक स्कूटी अपने कब्जे में ली। हैरानी की बात तो यह हैं कि जिस तरह नवम्बर और दिसम्बर 2011 में कथित इंडियन मुजाहिदीन के सात लोगों को गिरफ्तार किया था और उसमें गृहमंत्री ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया था। लेकिन पुलिस आयुक्त खामोशी लगाए हुए थे। ठीक उसी तरह से खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस आयुक्त खामोशी अख्तियार किए रहे।
बताया जाता है कि गिरफ्तार व्यक्ति सैयद मोहम्मद अहमद काजमी मौजूदा समय में तेहरान की न्यूज एजेंसी आईआरबीए के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता के रूप में जुड़कर काम कर रहे थे। इससे पहले वह इराक युद्ध के दौरान जब कोई भारतीय पत्रकार जाने को तैयार नहीं था उस समय सैयद अहमद काजमी ने दूरदर्शन के लिए रिर्पोटिंग की थी। श्री काजमी को विदेशी मामलों में अच्छी जानकारी रखते हैं और वह पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार रहे हैं। जबकि मान्यता प्रदान करने से पहले गृहमंत्रालय और दिल्ली पुलिस के विभिन्न सेल जांच पड़ताल करते हैं उसके बाद ही कार्ड जारी किया जाता है। गिरफ्तार व्यक्ति का कभी कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं रहा है। वह पहले उत्तरी पूर्वी जिले के वेलकम इलाके में रहता था। उसके बाद वह दक्षिण दिल्ली के जोरबाग में रहने लगा था। दिल्ली पुलिस ने आंतकी गतिविधियों में शामिल होने और आरोपियों को सरंक्षण देने तथा आपराधिक षडयंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आज दोपहर बाद तीस हजारी अदालत में पेश किया। पुलिस ने आरोपी का बीस दिन का पुलिस रिमांड मांगा जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वहीं आरोपी के वकील ने काफी बहस की और इस मामले में आरोपी को बेकसूर बताते हुए बहस की। अदालत ने दिल्ली पुलिस को पुलिस रिमांड देते समय हिदायत दी है कि 48 घंटे में एक बार मेडिकल जांच और 24 घंटे के भीतर एक बार आधा घंटे के लिए आरोपी को उसके वकील से मिलने की भी इजाजत देते हुए हिदायत दी है।
सैयद मोहम्मद काजमी को दिल्ली से तब पकड़ा गया जब जांच में पता चला कि वह इजराइली राजनयिक ताल एहोशुआ की कार में 13 फरवरी को मैग्नेटिक बम चिपकाने वाले संदिग्ध के संपर्क में था ऐसा कहना है दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का। पुलिस का आरोप है कि श्री काजमी ने इजराइली राजनयिकों के आवागमन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इजराइली दूतावास की टोह लेने में कथित तौर पर संदिग्ध की मदद की थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने दिल्ली के नजदीक उसके गृह स्थान की तलाशी भी ली। गौरतलब है कि दिल्ली में दो बाइक सवारों ने इजरायली दूतावास की कार को स्टीकर बम लगाकर उड़ा दिया था जिसमें इजरायली राजनयिक ताल येहोशुआ तथा दूतावास के एक भारतीय चालक सहित चार लोग घायल हो गए थे। हांलाकि अदालत में दिल्ली पुलिस के अधिकारी न तो केस डायरी ही प्रस्तुत कर सके थे। जिससे यह पता चल पाता कि गिरफ्तारी का आधार क्या है। पुलिस का कहना है कि आंतकी गतिविधियों में लिप्त है और उन्होंने मुख्य आरोपी को संरक्षण देते हुए टोह लेने में मदद की। पुलिस के पास मुख्य आरोपी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। केवल जल्द पकडऩे का पुराना राग अलाप रही है। हैरानी की बात तो यह है कि जब मुख्य आरोपी का नाम पता ही नहीं मालूम है कि फिर पुलिस को यह कैसे पता चल गया कि काजमी ने आरोपी के साथ मिलकर इजराइली राजनयिक की टोह ली थी। पुलिस को यह कैसे पता चल गया कि आरोपी मुख्य आरोपी के सम्पर्क में है। यदि पता भी चल गया तो फिर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाए उसको सरंक्षण देने वाले को गिरफ्तार करने में क्यों जल्द बाजी की और मुख्य आरोपी को अभी तक गिरफ्तार करने में क्यों नाकाम रही है।
इस गिरफ्तारी के बाद से मुस्लिम इलाकों में चर्चा है कि कांग्रेंस ने उत्तर प्रदेश में मुसलमानों द्वारा कांग्रेस को मतदान न करने का सबक सिखाने के लिए यह कार्रवाई कराई है। मुसलमानों के हितो और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदार लेने के बजाए मुसलमानों को उनकी औकात बताने के लिए मुस्लिम बाहुल इलाकों में इस तरह की कार्रवाई गृहमंत्रालय के इशारे पर कराई जा रही है। यही वजह है कि कांग्रेस का एक खेमा बटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की जांच कराने की बात कर रहा है लेकिन गृहमंत्री जांच कराने ही नहीं चाहते हैं जिससे कि फर्जी मुठभेड़ की बात को बल मिलता है। कहा यह भी जाता है कि अंतर्राष्टï्रीय दबा के चलते यह गिरफ्तारी की गई है। बताया जाता है कि इजराइली कार धमाके के बाद ईरान सरकार के पक्ष और अमेरिका एवं इजराइल द्वारा प्रचारित किए जा रहे इस्लामी आंतकवाद के विरुद्ध काजमी ने कई लेख लिख थे। इतना ही नहीं इसके बाद एक खबरिया चैनल पर सैयद मोहम्मद अहमद काजमी का साक्षात्कार भी प्रसारित किया था। उसके बाद प्रतिक्रियास्वरूप यह कार्रवाई अमल में लायी गई।

Saturday, 18 February 2012

भगवा आंतकवादियों की भी होगी धर-पकड़


भगवा आंतकवादियों की भी होगी धर-पकड़
- 2006 के बाद हुए धमाकों की नए सिरे से होगी जांच: चिदंबरम
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 18 फरवरी। अगर गृहमंत्री पी. चिदंबरम की इस बात को सही माने कि जब से उन्होंने हिन्दू संगठनों की आंतकवादी गतिविधियों की जांच शुरू कराई है और संघ के अनुषंगी संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कराया है, तभी से भाजपा उनके खिलाफ आक्रामक हुई है। अभी तक तमाम एजेंसियां मुस्लिम आतंकी संगठनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी तो संघ को कोई ऐतराज नहीं था। जब समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट और माले गांव विस्फोट की जांच की गई और उसमें भगवा आतंकवाद का चेहरा नजर आया तो संघ और उससे जुड़े संगठनों के सुर ही बदल गए। हिन्दू संगठनों के आगे के संकेत अच्छे नहीं दिख रहे हैं। गृहमंत्री ने हिन्दू संगठनों के खिलाफ जांच तेज करने का निर्देश दिया है। इंदौर में संघ से जुड़े रहे कमल चौहान को समझौता बत विस्फोट में गिरफ्तारी के बाद नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के जांच की पूरी दिशा ही बदल गई है। गृहमंत्रालय ने एनआईए को पिछले पांच-छह साल में हुई आंतकी घटनाओं की नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अब एनआईए इन घटनाओं की जांच हिन्दू संगठनों को केन्द्र में रखकर करेगी। इससे भाजपा को फिर यह कहने का मौका मिलेगा कि चिदंबरम ने एनआईए का गठन संघ और दूसरे हिन्दू संगठनों को फंसाने के लिए ही किया है। चिदंबरम के नए निर्देशों के बाद एनआई 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट, 2007 के समझौता और मक्का मस्जिद विस्फोट और उसके बाद हुए अजमेर और मोडासा विस्फोट की जांच नए सिरे से करेगी। एनआईए अब तक संघ से जुड़े रहे कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जिनमें असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा, देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा तथा कमल चौहान आदि हैं।
संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार से पूछताछ हुई है। अब सरकार ज्यादा सख्ती के साथ हिन्दू संगठनों की जांच करेगी। नतीजा जो भी निकले चिदंबरम और दिग्विजय सिंह का फोकस यह साबित करने पर रहेगा कि संघ आतंकी घटनाओं में शामिल है। इसमें संघ बेकफुट पर आया है और भाजपा से कहा गया है कि वे सरकार की इस चाल का जोरदार ढंग से जवाब दे। इस जवाबी कार्रवाई में सरकार और विपक्ष का टकराव और बढ़ेगा।

Wednesday, 4 January 2012

दिल्ली पुलिस ·ी वार्षि· प्रेस वार्ता ·ी तैयारी जोरों पर



- भोजन 400  को उपहार (प्रेस किट) 500 को 
मो.अनस सिद्दीकी
नई दिल्ली 04 जनवरी। दिल्ली पुलिस अपने वार्षिक  संवाददाता सम्मेलन की तैयारी उसी तरह करती है जिस तरह एक  बाप अपनी बेटी की शादी  की  तैयारी करता है। इस बार दिल्ली पुलिस ने वार्षिक  संवाददाता सम्मेलन में त\करीबन चार सौ लोगों को  आमंत्रित करने की योजना बनाई है। जिसमें स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्टï्रीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनि· मीडिया ·ो बुलाया जाता है। हर साल संवाददाता सम्मेलन ·े बाद पत्र·ारों में पुलिस ·ी डायरी ·े लिए(·थित मीडिया) ·िट ·े लिए ·ाफी मारा-मारी होती है। इस ·े लिए दिल्ली पुलिस ·े जनसम्पर्· विभाग ·े दर्जनों जवानों तैनात रहते हैं। ·ानून ·ा पाठ पढ़ाने वाली पुलिस और उस·े भोंपू बने मीडिया·र्मियों ·ो ·िसी शि·ार पर शि·ारी ·े टूटने ·े अंदाज में देखा जाता है।  छोटी-छोटी गतिविधियों पर नजर रखने वाली दिल्ली पुलिस ने इस·े लिए ·िसी प्र·ार ·ी ·ोई व्यवस्था नहीं ·ी है। हांला·ि अब त· ·ी घटनाओं में नेताओं पर जूते एंव थप्पड़ मारने वाले लोग पत्र·ारों ·े गलियारे से ही नि·ल ·र हमले ·रते रहे हैं।ee
जान·ार सूत्रों ·े मुताबि· वर्ष 2012 ·े संवाददाता सम्मेलन में अपराध जगत ·ी खबरों ·ा सं·लन ·रने वाले पत्र·ार और दिल्ली पुलिस ·े आला अफसरों समेत सभी ·े लिए चाय, ·ाफी, ·ोल्ड ड्रिं·/जूस, गोलगप्पे(आटा/सूजी), पापड़ी चाट, मूंग ·ी दाल ·ा चिल्ला/परांठा, भल्ला पापड़ी, आलू ·ी टिक्·ी, टोमाटो सूप, स्वीट ·ॉर्न सूप,, ग्रीन सलाद, ऑनियन सलाद, वेज पुलाव, सादा चावल, बेबी नॉन, बटर नॉन, मिस्सी रोटी, लच्छा परांठा, तंदूरी रोटी, दाल तड़·ा, दाल मखनी, ·ढ़ाई पनीर, मटर बादाम ·ोरमा, ·ढ़ी प·ौड़ा, मिक्स वेज(ऋतु ·े अनुसार), बटर चि·न, मटन रोगन जोश, मटन बिरयानी, सीं· वाली ·ुल्फी, गुलाब जामुन ·े अलावा जलेबी रबड़ी ·े साथ दस्तयाब होगी। अब देखना यह होगा ·ि इतना सब·ुछ खाने ·े बाद भी पत्र·ार ए·-दूसरे ·ो गरियाते हुए नजर आयेंगे। ·ोई पत्र·ार दिल्ली पुलिस ·ी खिचाई न ·रे अथवा न·ारात्म· सवाल न पूछे इस·े लिए भी दिल्ली पुलिस ·े जनसम्पर्· विभाग ने अपने चहेते पत्र·ारों ·े साथ गुप्त मंत्रणा ·र ली है।
भरोसेमंद सूत्रों ·े अनुसार चार सौ लोगों ·ी भीड़ में ·ेवल 15-20 सवालों ·ो दिल्ली पुलिस आयुक्त से पूछने ·ी इजाजत होगी। इनमें भी ·ई ऐसे पत्र·ार होंगे जो ·ि ए· से ज्यादा प्रश्न पूछेंगे। सूत्रों ·े मुताबि· जनसम्पर्· विभाग ·ी ओर से यह भी बंदोबस्त ·िया जा रहा है ·ि उर्दू, पंजाबी, संस्·ृति और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में प्र·ाशित होने वाले एवं ·म प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों ·े प्रतिनिधियों ·ो न घुसने दिया जाए। हांला·ि हर साल ऐसे लोग घुस आते हैं। सूत्रों ·ा यह भी ·हना है ·ि अपराध संबंधित समाचारों ·ो सं·लित ·रने वाले पत्र·ारों ·े अलावा मुख्य संवाददाता, छाया·ार, मेट्रो एडीटर, न्यूज एडीटरों ·े अलावा एडीटर इन चीफों ·ी संख्या भी ·ाफी मात्रा में होती है।
·िसी प्र·ार ·ी ·ोई घटना न घटे अथवा पत्रकारों ·ी आड़ में ·ोई असामिज· तत्व न घुस जाए और उन·ी गतिविधियों पर नजर रखने ·े लिए ·िसी प्र·ार ·े सीसीटीवी ·ैमरों ·ी व्यवस्था नहीं ·ी गई है। ·ाबिलेगौर है ·ि गूहमंत्री पी.चिदंबरम पर जूता फे·ने ·ी हर·त ए· पत्र·ार ·े द्वारा ही ·ी गई थी। ·ेन्द्रीय मंत्री शरद पवार पर ·ृपाण से हमला ·रने वाला युव· भी पत्र·ारों ·े बीच होता हुआ मंत्री त· पहुंचा था और थप्पड़ मारा था। बाद में उसे मानसि· रोगी ·रार दिया गया। दिल्ली पुलिस ·े ए· आला अधि·ारी ·ा ·हना है ·ि हमने इस बार ऐसे ·ई पत्र·ारों ·ो चिंहित ·िया है जो ·ि दिल्ली पुलिस ·ी डायरी ·ो बेचने ·ा ·ाम ·रते हैं। बाद में इन डायरियों ·ो खरीदने वाले ·ानून ·ा उंल्लघर ·रने पर यातायात पुलिस ·े चालान से बचने ·े लिए इन डायरियों ·ो ·ारों ·े डेस बोर्ड पर रख·र रोब झाड़ते फिरते हैं। ऐसे पत्र·ारों ·ो भी इस बार दिल्ली पुलिस ·े वार्षि· संवाददाता सम्मेलन में नहीं घुसने दिया जाएगा।