इजराइल कार धमाके के आरोप में पत्रकार को किया गिरफ्तार
- गिरफ्तार युवक भारत सरकार के पीआईबी से मान्यता प्राप्त पत्रकार रहा है
- पांच वक्त का नमाजी और ईमानदार है आरोपी पत्रकार
- दिल्ली पुलिस के स्पेशल से मुख्य आरोपी को संरक्षण देने और षडयंत्र रचने के आरोप में किया गिरफ्तार, मुख्य आरोपी का कोई अता-पता नहीं
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 07 मार्च। अगर आप मुस्लिम है और निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं तो हो जाइए सावधान। क्योंकि अब चुन-चुनकर मुसलमानों को बताई जाएगी उनकी औकात। कुछ ऐसा ही संदेश दिया है दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने। सेल ने इजराइली दूतावास की कार पर 13 फरवरी को हुए बम हमले के मामले में तीन हफ्ते बाद भारत सरकार के पीआईबी से मान्यता प्राप्त पत्रकार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार मुस्लिम पत्रकार का नाम सैयद मोहम्मद अहमद काजमी है। दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने 20 दिन के पुलिस रिमांड की मांग की थी। जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 20 दिन के लिए पुलिस रिमांड दे दिया है। यह गिरफ्तारी दक्षिणी दिल्ली से की गई है।
गिरफ्तार मुस्लिम पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी को मंगलवार को प्रात: साढ़े ग्यारह बजे इंडिया इस्लामिक सेंटर से पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिया। जबकि दिल्ली पुलिस के स्पेशल ने गिरफ्तारी का समय 2.30 अपराह्नï दिखाया और रात नो बजे उसको उसके घर पर तलाशी के लिए लेकर गए। जहां से पुलिस ने एक स्कूटी अपने कब्जे में ली। हैरानी की बात तो यह हैं कि जिस तरह नवम्बर और दिसम्बर 2011 में कथित इंडियन मुजाहिदीन के सात लोगों को गिरफ्तार किया था और उसमें गृहमंत्री ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया था। लेकिन पुलिस आयुक्त खामोशी लगाए हुए थे। ठीक उसी तरह से खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस आयुक्त खामोशी अख्तियार किए रहे।
बताया जाता है कि गिरफ्तार व्यक्ति सैयद मोहम्मद अहमद काजमी मौजूदा समय में तेहरान की न्यूज एजेंसी आईआरबीए के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता के रूप में जुड़कर काम कर रहे थे। इससे पहले वह इराक युद्ध के दौरान जब कोई भारतीय पत्रकार जाने को तैयार नहीं था उस समय सैयद अहमद काजमी ने दूरदर्शन के लिए रिर्पोटिंग की थी। श्री काजमी को विदेशी मामलों में अच्छी जानकारी रखते हैं और वह पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार रहे हैं। जबकि मान्यता प्रदान करने से पहले गृहमंत्रालय और दिल्ली पुलिस के विभिन्न सेल जांच पड़ताल करते हैं उसके बाद ही कार्ड जारी किया जाता है। गिरफ्तार व्यक्ति का कभी कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं रहा है। वह पहले उत्तरी पूर्वी जिले के वेलकम इलाके में रहता था। उसके बाद वह दक्षिण दिल्ली के जोरबाग में रहने लगा था। दिल्ली पुलिस ने आंतकी गतिविधियों में शामिल होने और आरोपियों को सरंक्षण देने तथा आपराधिक षडयंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आज दोपहर बाद तीस हजारी अदालत में पेश किया। पुलिस ने आरोपी का बीस दिन का पुलिस रिमांड मांगा जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वहीं आरोपी के वकील ने काफी बहस की और इस मामले में आरोपी को बेकसूर बताते हुए बहस की। अदालत ने दिल्ली पुलिस को पुलिस रिमांड देते समय हिदायत दी है कि 48 घंटे में एक बार मेडिकल जांच और 24 घंटे के भीतर एक बार आधा घंटे के लिए आरोपी को उसके वकील से मिलने की भी इजाजत देते हुए हिदायत दी है।
सैयद मोहम्मद काजमी को दिल्ली से तब पकड़ा गया जब जांच में पता चला कि वह इजराइली राजनयिक ताल एहोशुआ की कार में 13 फरवरी को मैग्नेटिक बम चिपकाने वाले संदिग्ध के संपर्क में था ऐसा कहना है दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का। पुलिस का आरोप है कि श्री काजमी ने इजराइली राजनयिकों के आवागमन के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इजराइली दूतावास की टोह लेने में कथित तौर पर संदिग्ध की मदद की थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने दिल्ली के नजदीक उसके गृह स्थान की तलाशी भी ली। गौरतलब है कि दिल्ली में दो बाइक सवारों ने इजरायली दूतावास की कार को स्टीकर बम लगाकर उड़ा दिया था जिसमें इजरायली राजनयिक ताल येहोशुआ तथा दूतावास के एक भारतीय चालक सहित चार लोग घायल हो गए थे। हांलाकि अदालत में दिल्ली पुलिस के अधिकारी न तो केस डायरी ही प्रस्तुत कर सके थे। जिससे यह पता चल पाता कि गिरफ्तारी का आधार क्या है। पुलिस का कहना है कि आंतकी गतिविधियों में लिप्त है और उन्होंने मुख्य आरोपी को संरक्षण देते हुए टोह लेने में मदद की। पुलिस के पास मुख्य आरोपी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। केवल जल्द पकडऩे का पुराना राग अलाप रही है। हैरानी की बात तो यह है कि जब मुख्य आरोपी का नाम पता ही नहीं मालूम है कि फिर पुलिस को यह कैसे पता चल गया कि काजमी ने आरोपी के साथ मिलकर इजराइली राजनयिक की टोह ली थी। पुलिस को यह कैसे पता चल गया कि आरोपी मुख्य आरोपी के सम्पर्क में है। यदि पता भी चल गया तो फिर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाए उसको सरंक्षण देने वाले को गिरफ्तार करने में क्यों जल्द बाजी की और मुख्य आरोपी को अभी तक गिरफ्तार करने में क्यों नाकाम रही है।
इस गिरफ्तारी के बाद से मुस्लिम इलाकों में चर्चा है कि कांग्रेंस ने उत्तर प्रदेश में मुसलमानों द्वारा कांग्रेस को मतदान न करने का सबक सिखाने के लिए यह कार्रवाई कराई है। मुसलमानों के हितो और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदार लेने के बजाए मुसलमानों को उनकी औकात बताने के लिए मुस्लिम बाहुल इलाकों में इस तरह की कार्रवाई गृहमंत्रालय के इशारे पर कराई जा रही है। यही वजह है कि कांग्रेस का एक खेमा बटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की जांच कराने की बात कर रहा है लेकिन गृहमंत्री जांच कराने ही नहीं चाहते हैं जिससे कि फर्जी मुठभेड़ की बात को बल मिलता है। कहा यह भी जाता है कि अंतर्राष्टï्रीय दबा के चलते यह गिरफ्तारी की गई है। बताया जाता है कि इजराइली कार धमाके के बाद ईरान सरकार के पक्ष और अमेरिका एवं इजराइल द्वारा प्रचारित किए जा रहे इस्लामी आंतकवाद के विरुद्ध काजमी ने कई लेख लिख थे। इतना ही नहीं इसके बाद एक खबरिया चैनल पर सैयद मोहम्मद अहमद काजमी का साक्षात्कार भी प्रसारित किया था। उसके बाद प्रतिक्रियास्वरूप यह कार्रवाई अमल में लायी गई।
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