Sunday, 20 November 2011

डीआईपी में जारी लूट का खेल


डीआईपी निदेशक  रीता कुमार के संरक्षण में डीआईपी में जारी लूट का खेल
          दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय में विज्ञापन एजेंसियों के  सूचीबद्धता के  नाम पर खुलेआम लूट का खेल जारी है। समाचार पत्रों में छपी खबरों के बाद  भ्रष्ट अधिकारी मनी भूषण मल्होत्रा को  आखिरकार डीआईपी से जाना पड़ा। जिसके  बाद विभाग में अकेली पड़ी निदेशक  साहिबा को विभाग के  अधिकारियों की सुध आई, जो इस लुट में शामिल न किए जाने से खासे नाराज़ थे। मामला बिगड़ते देख आई.ए.एस. निदेशक  रीता  कुमार ने अभी तक कनारे किये  हुए विभाग के अधिकारियों से भी सलाह-मशविरा करना शुरू कर दिया है। अब इन अधिकारियों की भी बांछे खिल गई है, अभी तक  निदेशक  को  पानी पी-पी कर कोसने वाले यह अधिकारी बड़े गोलमाल की फिराक मे  हैं।
          सूत्रों के  मुताबिक  निदेशक  रीता कुमार कुछ ऐसी विज्ञापन ऐजेंसियों को सूचीबद्ध करने के लिए जिद्द पर अड़ी हुई है जो टेण्डर के मुताबिक  मानदंडों पर खरी नहीं उतरती हैं। इसलिए यह पूरा प्रकरण विभाग में चर्चा का  विषय बना हुआ है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि अपनी चहेती ऐजेंसियों को  सूचीबद्ध करने के लिए सुविधानुसार दस्तावेज तैयार कराए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ग्रेड 1 ऐजेंसियां ही दिल्ली सरकार  के  विज्ञापन जारी करती हैं जिससे इन एजेंसियों को भारी कमाई होती है। इसी कमाई को देखते हुए कुछ ऐजेंसियां  ग्रेड 1 में शामिल होने के लिए तरह-तरह के  जुगाड़ लगा रही हैं ओर मोटा चढ़ावा चढ़ाने को  तत्पर हैं। इसी मोटे चढ़ावे को लपकने के लिए विभाग में आपस में छींटाकशी और आर.टी.आई. युद्ध चला हुआ है।
          विभाग में नए आए उपनिदेशक  विकास गोयल इस पुरे प्रकरण में मूकदर्शक  बने हुए हैं और माल के  लिए मची इस जंग से हैरान-परेशान हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने विभाग के भ्रष्टाचार को देखते हुए विज्ञापन शाखा का काम देखने से इनकार कर दिया  था और विज्ञापन एजेंसियों की सूचीबद्धता के गड़बड़-झाले से भी दूर रहने की  इच्छा जाहिर की  है। 
          हास्यस्पद पहलु यह है कि निदेशक  रीता कुमार भारत सरकार के सूचना एवम् प्रसारण मंत्रालय की  निष्पक्ष एवम् स्वतंत्रा विज्ञापन एजेंसी डीएवीपी द्वारा सूचीबद्ध समाचार पत्रों को  ही नकली बताने पर तुली हुई है जोकि  इन की लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों के बारे में अज्ञानता की पराकाष्ठा है। गौरतलब है कि डीएवीपी से सूचीबद्ध समाचार पत्रों को पूरे भारतवर्ष की राज्य सरकारें विज्ञापन जारी करती हैं। डीएवीपी में समाचार पत्र  को सूचीबद्ध करते समय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा बनाई गई विज्ञापन नीति का पालन किया जाता है तथा आवश्यक  30-35 अनिवार्य पात्रता की  शर्तों पर उचित पाये जाने पर ही सूचीबद्ध किया जाता है।
          लघु एवम् मझौले समाचार पत्र स्थानीय समस्याओं को उजागर करने में अग्रणी भुमिका निभाते हैं और एयरकडीशन कल्चर की आई.ए.एस. रीता कुमार जैसे अधिकारियों को जगाने का काम करते हैं। निदेशक  रीता कुमार के पास दिल्ली से प्रकाशित होने वाले डीएवीपी से सूचीबद्ध लगभग 600 लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों की  समस्याएं सुनने का समय नहीं है। मगर विज्ञापन एजेंसियोंको सूचीबद्ध करने के लिए वह जिस प्रकार तत्परता दिखा रही है और चहेते अधिकारियों द्वारा जो सौदेबाजी का  खेल चल रहा है वह जांच का  विषय है

Monday, 7 November 2011

शहीदों ओर महापुरूषों के विज्ञापन को फिजुलखर्ची बताती है निदेशक

मामला दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय का
डीआईपी में घोटालो की सरंक्षक रीता कुमार
दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय में आजकल घपले-घोटालों की बयार आई हुई है। विज्ञापन एजेंसियों की सुचीबद्धता के कार्य में एक ऐसे व्यक्ति को सर्वेसर्वा बनाया हुआ है। जिसका तबादला कई महीनों पहले ही निदेशालय से हो चुका है। मगर रीता कुमार के सरंक्षण के चलते यह व्यक्ति मनी भुषण मल्होत्रा यहां पर जमा हुआ है। करोड़ो के इस गोल-माल के खेल में मनी भुषण मल्होत्रा को निदेशक रीता कुमार का विश्वस्त बताया जा रहा है। विज्ञापन ऐजेंसियों के प्रतिनिधियों एवम् प्रबंधकों को मनी भुषण मल्होत्रा एस.डी.एम. पहाड़गंज आॅफिस बुलाकर टटोल रहा है और उन्हें इशारा किया जा रहा है कि आप निदेशक के लिए क्या कर सकते हैं। मामला सिर्फ मेरा नहीं है अब अखबारों में खबर छप जाने से  मामला उपर तक पहुंच गया है। बताया तो यंहा तक जा रहा है कि इस पुरे प्रकरण में ईमानदार प्रेस सचिव तक का नाम घसीटा जा रहा है।
दिल्ली सरकार के अधिकतर विज्ञापन ग्रेड १ एजेंसियां ही जारी करती हैंै। ग्रेड १  में आने के लिए विज्ञापन ऐजेंसियां सुचना एवम् प्रचार निदेशालय में मोटा चढ़ावा चढ़ाती हैं। इसी चढ़ावे के ही मल्होत्रा को तबादले के पश्चात् भी रिलिव नहीं किया जा रहा है। विज्ञापन एजंेसियों की सुचीबद्धता के कार्य में निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों को किनारे किया हुआ है। जबकि इन्हें इस कार्य का लम्बा अनुभव है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि निदेशालय के अधिकारियों से फाइलों पर बिना सहमति लिए ही हस्ताक्षर कराए जा रहे है। जिससे इस घोटाले में कोई आवाज न उठा सके।
मनी भुषण मल्होत्रा अपनी चहेती एजेसियों को ग्रेड १ में शामिल करने के लिए हर हथकंडा अपनाने की फिराक में हैं और एजेंसियों से उनकी सहुलियत के हिसाब से बैलेंस शीट व अन्य दस्तावेज तैयार कराऐ जा रहे हैं ताकि मोटा चढ़ावा देने वाली एजेंसियों को ग्रेड १ में शामिल कर लाभ पहुचांया जा सके। गौरतलब है कि ग्रेड १ एजेंसियां दिल्ली सरकार के करोडो़ रूपए सालाना के विज्ञापन जारी करती है। जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है इसी मोटे कमीशन के खेल में अधिकारी बराबर के शरीक हैं। जबकि सरकार को इससे करोड़ो रूपए की चपत लग रही है।
सुचना एवम् प्रचार निदेशालय का असली मकसद ही समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी करना एवम् पत्राकारों के हितों का ध्यान रखना है। मगर दुख्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रद पहलु यह है कि यहां इन कार्यो को छोड़कर सिर्फ रिश्वत खोरी ओर लुट का बाजार गर्म है। जब से रीता कुमार (प्ण्।ण्ै) और मल्होत्रा की बेहतर टयूनिंग हुई है यंहा के अधिकारी बेबस बकरे की तरह नज़र आ रहे है।
ग्रेड १ में भी दिल्ली सरकार का अधिकतर काम पिछले छः महीने में कुछ चुनिंदा एजेंसियां ही कर रही हैं। भ्रष्टाचार का यह ताजा और जीता-जागता सबुत है।
हरियाणा सरकार के सुचना एवम् जन सम्पर्क विभाग ने इस करोड़ो रूपए की कमीशन खोरी को रोककर च्संवादज् नामक ऐजेंसी स्थापित की है। जिससे १५ प्रतिशत कमीशन जो समाचार पत्रों से काटा जाता है। वह एजेंसियों के जेब में जाने से बच सके। इससे बिचैलिओं को जाने वाले करोड़ों रूपए पर रोक लगी है। जो भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है। इस कमीशन के रूपए को बचाकर हरियाणा सरकार लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों को अधिक विज्ञापन जारी करती है। जिससे जंहा सरकार की योजनाएं आमजन तक पहुंचती है वही अपने आस्त्तिव की लड़ाई लड़ रहे लघु एवम् मझौले समाचार पत्रा को नई उर्जा मिलती है।
मगर दिल्ली सरकार में इसके उल्ट अपनी चहेती एजेंसियो को मोटे विज्ञापन जारी कर लाभ पहुंचाया जा रहा है और लोकपिर्य मुख्यमंत्राी को भी इस मामले से अनभिन्न रखा जा रहा है स्थिति अब यह हो गई है कि लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों के विज्ञापन निदेशक रीता कुमार और मनी भुषण मल्होत्रा ने इस लिए बंद कर दिए कि यह विज्ञापन एजेंसी के द्वारा न देकर निदेशालय द्वारा जारी किये जा रहे थे। जिससे एजेंसियों और भ्रष्ट अधिकारियों को कोई प्राप्ति नहीं हो रही थी।

शहीदों ओर महापुरूषों के विज्ञापन को फिजुलखर्ची बताती है निदेशक
दिल्ली सरकार में पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और विश्व में भारतीय पताका को फहराने वाली लोह महिला श्रीमती इंदिरा गांधी जी के शहीदी दिवस के विज्ञापन को केवल पचास समाचार पत्रों में ही छपवाकर खाना पुर्ति कर दी। जो कि राष्ट्र की महान विभूतियों के साथ धोखा है  ओर इन की शहादत का घोर अपमान है। हद तो यहां तक हो गई है कि निदेशक रीता कुमार महापुरूषों के जन्म एवम् शहीदी दिवस के विज्ञापनों को फिजुलखर्ची बताती है। जो कि इनकी दृष्टता को दर्शाता है। यह इन महापुरूषों एवम् नायकों को जनता के दिलों से दुर करने की साजिश है।

Thursday, 3 November 2011

patarkaarita mai hai junun

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