मामला दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय का
डीआईपी में घोटालो की सरंक्षक रीता कुमार
दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय में आजकल घपले-घोटालों की बयार आई हुई है। विज्ञापन एजेंसियों की सुचीबद्धता के कार्य में एक ऐसे व्यक्ति को सर्वेसर्वा बनाया हुआ है। जिसका तबादला कई महीनों पहले ही निदेशालय से हो चुका है। मगर रीता कुमार के सरंक्षण के चलते यह व्यक्ति मनी भुषण मल्होत्रा यहां पर जमा हुआ है। करोड़ो के इस गोल-माल के खेल में मनी भुषण मल्होत्रा को निदेशक रीता कुमार का विश्वस्त बताया जा रहा है। विज्ञापन ऐजेंसियों के प्रतिनिधियों एवम् प्रबंधकों को मनी भुषण मल्होत्रा एस.डी.एम. पहाड़गंज आॅफिस बुलाकर टटोल रहा है और उन्हें इशारा किया जा रहा है कि आप निदेशक के लिए क्या कर सकते हैं। मामला सिर्फ मेरा नहीं है अब अखबारों में खबर छप जाने से मामला उपर तक पहुंच गया है। बताया तो यंहा तक जा रहा है कि इस पुरे प्रकरण में ईमानदार प्रेस सचिव तक का नाम घसीटा जा रहा है।
दिल्ली सरकार के अधिकतर विज्ञापन ग्रेड १ एजेंसियां ही जारी करती हैंै। ग्रेड १ में आने के लिए विज्ञापन ऐजेंसियां सुचना एवम् प्रचार निदेशालय में मोटा चढ़ावा चढ़ाती हैं। इसी चढ़ावे के ही मल्होत्रा को तबादले के पश्चात् भी रिलिव नहीं किया जा रहा है। विज्ञापन एजंेसियों की सुचीबद्धता के कार्य में निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों को किनारे किया हुआ है। जबकि इन्हें इस कार्य का लम्बा अनुभव है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि निदेशालय के अधिकारियों से फाइलों पर बिना सहमति लिए ही हस्ताक्षर कराए जा रहे है। जिससे इस घोटाले में कोई आवाज न उठा सके।
मनी भुषण मल्होत्रा अपनी चहेती एजेसियों को ग्रेड १ में शामिल करने के लिए हर हथकंडा अपनाने की फिराक में हैं और एजेंसियों से उनकी सहुलियत के हिसाब से बैलेंस शीट व अन्य दस्तावेज तैयार कराऐ जा रहे हैं ताकि मोटा चढ़ावा देने वाली एजेंसियों को ग्रेड १ में शामिल कर लाभ पहुचांया जा सके। गौरतलब है कि ग्रेड १ एजेंसियां दिल्ली सरकार के करोडो़ रूपए सालाना के विज्ञापन जारी करती है। जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है इसी मोटे कमीशन के खेल में अधिकारी बराबर के शरीक हैं। जबकि सरकार को इससे करोड़ो रूपए की चपत लग रही है।
सुचना एवम् प्रचार निदेशालय का असली मकसद ही समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी करना एवम् पत्राकारों के हितों का ध्यान रखना है। मगर दुख्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रद पहलु यह है कि यहां इन कार्यो को छोड़कर सिर्फ रिश्वत खोरी ओर लुट का बाजार गर्म है। जब से रीता कुमार (प्ण्।ण्ै) और मल्होत्रा की बेहतर टयूनिंग हुई है यंहा के अधिकारी बेबस बकरे की तरह नज़र आ रहे है।
ग्रेड १ में भी दिल्ली सरकार का अधिकतर काम पिछले छः महीने में कुछ चुनिंदा एजेंसियां ही कर रही हैं। भ्रष्टाचार का यह ताजा और जीता-जागता सबुत है।
हरियाणा सरकार के सुचना एवम् जन सम्पर्क विभाग ने इस करोड़ो रूपए की कमीशन खोरी को रोककर च्संवादज् नामक ऐजेंसी स्थापित की है। जिससे १५ प्रतिशत कमीशन जो समाचार पत्रों से काटा जाता है। वह एजेंसियों के जेब में जाने से बच सके। इससे बिचैलिओं को जाने वाले करोड़ों रूपए पर रोक लगी है। जो भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है। इस कमीशन के रूपए को बचाकर हरियाणा सरकार लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों को अधिक विज्ञापन जारी करती है। जिससे जंहा सरकार की योजनाएं आमजन तक पहुंचती है वही अपने आस्त्तिव की लड़ाई लड़ रहे लघु एवम् मझौले समाचार पत्रा को नई उर्जा मिलती है।
मगर दिल्ली सरकार में इसके उल्ट अपनी चहेती एजेंसियो को मोटे विज्ञापन जारी कर लाभ पहुंचाया जा रहा है और लोकपिर्य मुख्यमंत्राी को भी इस मामले से अनभिन्न रखा जा रहा है स्थिति अब यह हो गई है कि लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों के विज्ञापन निदेशक रीता कुमार और मनी भुषण मल्होत्रा ने इस लिए बंद कर दिए कि यह विज्ञापन एजेंसी के द्वारा न देकर निदेशालय द्वारा जारी किये जा रहे थे। जिससे एजेंसियों और भ्रष्ट अधिकारियों को कोई प्राप्ति नहीं हो रही थी।
शहीदों ओर महापुरूषों के विज्ञापन को फिजुलखर्ची बताती है निदेशक
दिल्ली सरकार में पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और विश्व में भारतीय पताका को फहराने वाली लोह महिला श्रीमती इंदिरा गांधी जी के शहीदी दिवस के विज्ञापन को केवल पचास समाचार पत्रों में ही छपवाकर खाना पुर्ति कर दी। जो कि राष्ट्र की महान विभूतियों के साथ धोखा है ओर इन की शहादत का घोर अपमान है। हद तो यहां तक हो गई है कि निदेशक रीता कुमार महापुरूषों के जन्म एवम् शहीदी दिवस के विज्ञापनों को फिजुलखर्ची बताती है। जो कि इनकी दृष्टता को दर्शाता है। यह इन महापुरूषों एवम् नायकों को जनता के दिलों से दुर करने की साजिश है।
डीआईपी में घोटालो की सरंक्षक रीता कुमार
दिल्ली सरकार के सूचना एवम् प्रचार निदेशालय में आजकल घपले-घोटालों की बयार आई हुई है। विज्ञापन एजेंसियों की सुचीबद्धता के कार्य में एक ऐसे व्यक्ति को सर्वेसर्वा बनाया हुआ है। जिसका तबादला कई महीनों पहले ही निदेशालय से हो चुका है। मगर रीता कुमार के सरंक्षण के चलते यह व्यक्ति मनी भुषण मल्होत्रा यहां पर जमा हुआ है। करोड़ो के इस गोल-माल के खेल में मनी भुषण मल्होत्रा को निदेशक रीता कुमार का विश्वस्त बताया जा रहा है। विज्ञापन ऐजेंसियों के प्रतिनिधियों एवम् प्रबंधकों को मनी भुषण मल्होत्रा एस.डी.एम. पहाड़गंज आॅफिस बुलाकर टटोल रहा है और उन्हें इशारा किया जा रहा है कि आप निदेशक के लिए क्या कर सकते हैं। मामला सिर्फ मेरा नहीं है अब अखबारों में खबर छप जाने से मामला उपर तक पहुंच गया है। बताया तो यंहा तक जा रहा है कि इस पुरे प्रकरण में ईमानदार प्रेस सचिव तक का नाम घसीटा जा रहा है।
दिल्ली सरकार के अधिकतर विज्ञापन ग्रेड १ एजेंसियां ही जारी करती हैंै। ग्रेड १ में आने के लिए विज्ञापन ऐजेंसियां सुचना एवम् प्रचार निदेशालय में मोटा चढ़ावा चढ़ाती हैं। इसी चढ़ावे के ही मल्होत्रा को तबादले के पश्चात् भी रिलिव नहीं किया जा रहा है। विज्ञापन एजंेसियों की सुचीबद्धता के कार्य में निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों को किनारे किया हुआ है। जबकि इन्हें इस कार्य का लम्बा अनुभव है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि निदेशालय के अधिकारियों से फाइलों पर बिना सहमति लिए ही हस्ताक्षर कराए जा रहे है। जिससे इस घोटाले में कोई आवाज न उठा सके।
मनी भुषण मल्होत्रा अपनी चहेती एजेसियों को ग्रेड १ में शामिल करने के लिए हर हथकंडा अपनाने की फिराक में हैं और एजेंसियों से उनकी सहुलियत के हिसाब से बैलेंस शीट व अन्य दस्तावेज तैयार कराऐ जा रहे हैं ताकि मोटा चढ़ावा देने वाली एजेंसियों को ग्रेड १ में शामिल कर लाभ पहुचांया जा सके। गौरतलब है कि ग्रेड १ एजेंसियां दिल्ली सरकार के करोडो़ रूपए सालाना के विज्ञापन जारी करती है। जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है इसी मोटे कमीशन के खेल में अधिकारी बराबर के शरीक हैं। जबकि सरकार को इससे करोड़ो रूपए की चपत लग रही है।
सुचना एवम् प्रचार निदेशालय का असली मकसद ही समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी करना एवम् पत्राकारों के हितों का ध्यान रखना है। मगर दुख्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रद पहलु यह है कि यहां इन कार्यो को छोड़कर सिर्फ रिश्वत खोरी ओर लुट का बाजार गर्म है। जब से रीता कुमार (प्ण्।ण्ै) और मल्होत्रा की बेहतर टयूनिंग हुई है यंहा के अधिकारी बेबस बकरे की तरह नज़र आ रहे है।
ग्रेड १ में भी दिल्ली सरकार का अधिकतर काम पिछले छः महीने में कुछ चुनिंदा एजेंसियां ही कर रही हैं। भ्रष्टाचार का यह ताजा और जीता-जागता सबुत है।
हरियाणा सरकार के सुचना एवम् जन सम्पर्क विभाग ने इस करोड़ो रूपए की कमीशन खोरी को रोककर च्संवादज् नामक ऐजेंसी स्थापित की है। जिससे १५ प्रतिशत कमीशन जो समाचार पत्रों से काटा जाता है। वह एजेंसियों के जेब में जाने से बच सके। इससे बिचैलिओं को जाने वाले करोड़ों रूपए पर रोक लगी है। जो भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है। इस कमीशन के रूपए को बचाकर हरियाणा सरकार लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों को अधिक विज्ञापन जारी करती है। जिससे जंहा सरकार की योजनाएं आमजन तक पहुंचती है वही अपने आस्त्तिव की लड़ाई लड़ रहे लघु एवम् मझौले समाचार पत्रा को नई उर्जा मिलती है।
मगर दिल्ली सरकार में इसके उल्ट अपनी चहेती एजेंसियो को मोटे विज्ञापन जारी कर लाभ पहुंचाया जा रहा है और लोकपिर्य मुख्यमंत्राी को भी इस मामले से अनभिन्न रखा जा रहा है स्थिति अब यह हो गई है कि लघु एवम् मझौले समाचार पत्रों के विज्ञापन निदेशक रीता कुमार और मनी भुषण मल्होत्रा ने इस लिए बंद कर दिए कि यह विज्ञापन एजेंसी के द्वारा न देकर निदेशालय द्वारा जारी किये जा रहे थे। जिससे एजेंसियों और भ्रष्ट अधिकारियों को कोई प्राप्ति नहीं हो रही थी।
शहीदों ओर महापुरूषों के विज्ञापन को फिजुलखर्ची बताती है निदेशक
दिल्ली सरकार में पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और विश्व में भारतीय पताका को फहराने वाली लोह महिला श्रीमती इंदिरा गांधी जी के शहीदी दिवस के विज्ञापन को केवल पचास समाचार पत्रों में ही छपवाकर खाना पुर्ति कर दी। जो कि राष्ट्र की महान विभूतियों के साथ धोखा है ओर इन की शहादत का घोर अपमान है। हद तो यहां तक हो गई है कि निदेशक रीता कुमार महापुरूषों के जन्म एवम् शहीदी दिवस के विज्ञापनों को फिजुलखर्ची बताती है। जो कि इनकी दृष्टता को दर्शाता है। यह इन महापुरूषों एवम् नायकों को जनता के दिलों से दुर करने की साजिश है।
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