Monday, 12 March 2012

राज्यसभा के लिए घमासान शुरू, सपा और कांग्रेस में सांसत


- सपा की ओर से मुसलमानों में कमाल फारुकी या शाहिद सिद्दीक़ी
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव को भारी बहुमत मिला है, लेकिन इसके साथ ही उनका सिदर्द भी बढऩे वाला है। 30 मार्च को उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर राज्यसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसमें से मुलायम के हिस्से में छह सीटें जाएंगी। बसपा को सिर्फ दो सीटों से संतोष करना होगा तो भाजपा और कांग्रेस गठबंधन एक-एक सीट जीत पाएंगे। मुलायम सिंह की मुश्किल यह है कि वे किसको राज्यसभा भेजेंगे। चुनाव से ऐन पहले करीब आधा दर्जन नेता दूसरी पार्टियों से टूटकर सिर्फ राज्यसभा सीट की जुगाड़ में मुलायम की पार्टी में शामिल हुए। अगर मुलायम उन सबको उपकृत करते हैं तो उनकी अपनी पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का क्या होगा?
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और सपा के रास्ता बसपा में गए नरेश अग्रवाल अपने पूरे कुनबे के साथ सपा में शामिल हो गए थे। वे बसपा से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन बहनजी ने उन्हें फिर से राज्यसभा नहीं भेजने के संकेत दे दिए थे। इसलिए उन्होंने बिलकुल सही समय पर सपा में एंट्री की। उनका बेटा हरदोई से फिर विधायक हो गया और वे राज्यसभा की जुगाड़ में है। इसी तरह राष्ट्रीय लोकदल के शाहिद सिद्दीकी ने ऐन चुनावों से पहले सपा में एंट्री मारी थी। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नेताजी उनको इस बार राज्यसभा भेजेंगे, आखिर पूरे प्रदेश के मुसलमानों ने अपना मुलायम कहकर उनको वोट दिया है, लेकिन ऐसी ही उम्मीद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े रहे कमाल फारुकी को भी है। उन्होंने भी पूरे चुनाव के दौरान टेलीविजन चैनलों पर सपा की तरफदारी की, जैसे पहले कांग्रेस की किया करते थे। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। इन दो मुस्लिम चेहरों में से मुलायम सिंह किसे चुनेंगे, यह देखने वाली बात होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-रालोद गठबंधन को झटका देने के लिए मुलायम सिंह ने अजित सिंह की सबसे करीबी सहयोगी रही अनुराधा चौधरी को अपनी पार्टी में शामिल कराया था। वे भी राज्यसभा की सीट चाहती है। अगर मुलायम पश्चिम में अपना आधार बढ़ाना चाहेंगे तो वे अनुराधा चौधरी को भी राज्यसभा भेज सकते हैं। सपा के सूत्रों का कहना है कि आयात किए गए कुछ नेताओं को इस बार राज्यसभा मिलेगी और कुछ नेताओं को 2014 में। अगर वे धीरज के साथ सपा में रहते हैं तो दो साल बाद उनकी लॉटरी निकलेगी।
भारतीय जनता पार्टी इस बार राज्यसभा में कुछ नए चेहरों को भेज सकती है। वैसे पार्टी ने अभी राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम पर औपचारिक रूप से विचार नहीं किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक पिछली बार अभिनेत्री स्मृति ईरानी से मात खा जाने वाली पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन इस बार राज्यसभा में जा सकती है। हालांकि यह तय नहीं है कि वे कहां से जाएंगी, लेकिन उनके नाम पर पार्टी आलाकमान में एक राय है। इसी तरह पार्टी ऑफिस का काम संभालने वाले कई मामलों में विवादित सचिव श्याम जाजू की लॉटरी भी खुल सकती है। बताया जा रहा है कि नितिन गडकरी उन्हें राज्यसभा भेजने के पक्ष में है। नए चेहरों में धर्मेंद्र प्रधानऔर अशोक प्रधान के नाम की भी चर्चा है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का नाम छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए चर्चा में है, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की रिश्तेदार करुणा शुक्ला की टिकट कटेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा के पांच सांसद रिटायर हो रहे हैं, लेकिन इस बार चार ही सांसद जीत पाएंगे। तभी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा लॉबिंग हो रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा और कप्तान सिंह सोलंकी का फिर से चुना जाना तय है। इनके अलावा नारायण सिंह केसरी, अनुसूया उइके और मेघराज जैन रिटायर हो रहे हैं।
गुजरात से विजय कुमार रूपानी का फिर से राज्यसभा सदस्य बनना तय माना जा रहा है। गुजरात से भी अरुण जेटली फिर से चुने जाएंगे। इनके अलावा बिहार के रविशंकर प्रसाद और कर्नाटक से हेमा मालिनी का चुना जाना भी तय बताया जा रहा है। महाराष्ट्र से पार्टी के वरिष्ठ नेता बाल आप्टे रिटायर हो रहे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें फिर से टिकट देगी। इसी तरह हिमाचल से रिटायर हो रहे विप्लव ठाकुर के फिर से चुने जाने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में कलराज मिश्र और विनय कटियार  दोनों रिटायर हो रहे हैं। कलराज मिश्र विधानसभा का चुनाव जीत गए हैं। इसलिए विनय कटियार फिर से राज्यसभा में जा सकते हैं।
राज्यसभा में 31 मार्च को रिटायर हो रहे शादीलाल बत्तरा के बाद अब हरियाणा की इस एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए खेमेबंदी शुरू हो चुकी है। पंजाबी समुदाय के बत्तरा को एचआर भारद्वाज को राज्यपाल के तौर पर कर्नाटक भेजे जाने के बाद भारद्वाज के शेष 3 वर्षीय कार्यकाल के लिए राज्यसभा में भेजा गया। मूलत: यह ब्राह्मण सीट है। शादीलाल बत्तरा सांसद के तौर पर कोई असर दिखा पाने में पूरी तरह से असफल रहे और हो सकता है कि पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा का कार्यकाल न दे मगर मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की चली तो यह फूलचंद मुलाना को राज्यसभा भिजवा सकते हैं, लेकिन हरियाणा में उनके विरोधी वीरेंद्र सिंह और शैलजा जाट जगदीश नेहराया रमेश कौशिक की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं। कतार में खड़े अन्य लोगों में रंजीत सिंह भी शामिल है। अगर पार्टी किसी पंजाबी को राज्यसभा भेजती है तो पंजाबी महासभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री एसी चौधरी को राज्यसभा में एंट्री मिल सकती है।

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