फसीह को 6 जून तक ढूंढे सरकार :सुप्रीम कोर्ट
मो.अनस सिद्दीक़ी
नई दिल्ली, 01 जून। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को सऊदी अरब के जुबेल से 13 मई 2012 को गिरफ्तार किए गए बिहार के इंजीनियर को ढूंढने और उसकी खैर खबर की रिपोर्ट 6जून 2012 तक देने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश इंजीनियर फसीह मोहम्मद की पत्नी निकहत परवीन की याचिका पर दिया गया।
निकहत परवीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकत्र्ता दायर की थी कि उसके पति फसीह महूमद जो कि सऊदी अरब के जुबैल इलाके में रहते हैं। निकहत ने याचिका में कहा कि वहां पर 13 मई 2012 को सऊदी पुलिस के साथ भारतीय एजेंसी के लोग थे। उन्होंने कहा कि उसके पति की आंतकी कार्रवाई की संलिप्तता के चलते तलाश है। उसे पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। इसके बाद से निकहत परवीन अपने पति फसीह महमूद को ढूंढ रही है। जस्टिस के.एस. राधाकृष्णन और जस्टिस जे.एस. खेहर की खडंपीठ ने सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार और विदेश मंत्रालय को नोटिस दिया था 48 घंटे के भीतर फसीह महमूद के बारेे में रिपोर्ट दाखिल की जाए। इस पर शुक्रवार को केन्द्र सरकार की ओर से काउंसिल आर.पी. भट्ट पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को निकहत परवीन की याचिका पर जवाब देने के लिए दो दिन का समय दिया गया था जो कि अपर्याप्त था। भट्ट गृहमंत्रालय की ओर से पेश हुए थे। अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि याचिकाकत्र्ता निकहत परवीन के पति का मामला बेहद संगीन है। सरकारी वकील ने कहा कि गृहमंत्री को समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि फसीह महमूद के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने कांउसिल के उस बयान पर फटकार लगाते हुए कहा कि फसीह महमूद के बारे में कोई जानकारी सरकार के पास अभी तक क्यों नहीं है। समाचार पत्रों की बात छोड़कर यह बताएं कि सरकार की ओर से क्या जानकारी के उनके पास है।
गौरतलब है कि फसीह महमूद सऊदी अरब में बतौर इंजीनियर कार्यरत है। उसको वहां से भारतीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गृहमंत्रालय की ओर से पेश हुए वकील आर.पी. भट्ट के माध्यम से सरकार को 6 जून तक का समय दिया है कि फसीह महमूद को ढूंढकर अथवा उसके बारे में पुख्ता जानकारी अदालत के समक्ष दी जाए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूछा कश्मीरी छात्र किसके कब्जे में थे
- केन्द्र सरकार और यूपी एटीएस को नोटिस जारी
कार्यालय संवाददाता
नई दिल्ली, 01 जून। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मदरसा जमीयतुल फलाह के दो छात्रों को उत्तर प्रदेश के आंतकविरोधी दस्ता(यूपी एटीएस) के अधिकारियों के द्वारा अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर कैफियत एक्सप्रेस से जबरन गैर कानूनी ढंग से हिरासत में लिया था। इस मामले पर मदरसे के निदेशक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को केन्द्र सरकार और यूपी एटीएस को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में अदालत ने कहा है कि कैसे और क्यों अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से कैफियत एक्सप्रेस से छात्रों को हिरासत में लिया और मौजूदा समय में उनकी क्या स्थिति है।
मदरसा जमीयतुल फलाह के निदेशक मौलाना महमूद ताहिर मदनी ने अदालत में याचिका दायर की थी। मदनी ने पुलिस और यूपी एटीएस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया। अदालत ने एजेंसियों से पूछा कि अगर वो समाज के लिए खतरा बन रहे थे या उनकी वजह से बदअमनी पैदा हो सकती है तो उसके लिए कानून संबंधी धाराओं के तहत गिरफ्तारी की जानी चाहिए। एक समुदाय के लोग ही क्यों बदअमनी फैला रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार, यूपी एटीएस, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलीगढ़, पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी आजमगढ़ को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
जमीयतुल फलाह के वकील सैयद फरमान अहमद नकवी ने बताया कि अदालत अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किए गए कश्मीरी छात्रों को लेकर सरकार और यूपी एटीएस के अधिकारियों और उनकी कार्यप्रणाली से सख्त नाराज थी। आंतक के मामले में गिरफ्तारी क्यों और कैसे की गई इस पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के वकील नकवी के अनुसार सीआरपीसी की धारा 57 के अनुसार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी सूचना 24 घंटे के भीतर उसके परिजनों को अदालत में पेश करने से पहले सूचित किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में यूपी एटीएस ने गैरकानूनी ढंग से काम किया है।
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